- बैठक में आरएसएस से जुड़े 32 संगठनों के अध्यक्ष और महासचिव भी ले रहे है भाग
- क्षेत्रीय प्रमुख भी अपने कार्यों, कार्यक्रमों, भूमिका और भविष्य की योजनाओं को प्रस्तुत करेंगे
बेंगलुरु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की तीन दिवसीय वार्षिक बैठक शुक्रवार से शुरू हो गई। पहले दिन पदाधिकारियों ने संघ की कार्ययोजना को लेकर चर्चा की। बेंगलुरु में RSS की पांचवीं अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में संगठन प्रमुख मोहन भागवत भी मौजूद रहे। संघ के मुख्य प्रवक्ता सुनील आंबेकर ने बताया कि बैठक के दौरान कार्यकारी समिति बांग्लादेश और आरएसएस के शताब्दी समारोह को लेकर प्रस्ताव पारित करेगी। आंबेकर ने बताया कि इस तीन दिवसीय बैठक में आरएसएस से जुड़े 32 संगठनों के अध्यक्ष और महासचिव भी भाग लेंगे, जिनमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और महासचिव बी एल संतोष भी शामिल होंगे। साल साल बाद हो रहा आयोजन : आरएसएस के मुख्य प्रवक्ता सुनील आंबेकर ने बताया, ''21 से 23 मार्च तक आरएसएस की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के कार्यकारी समिति के सदस्य यहां मिलेंगे। यह आयोजन चार साल बाद बेंगलुरु में हो रहा है।'' आंबेकर ने बताया कि संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले, संघ द्वारा किए गए कार्यों और उसके भविष्य की रूपरेखा का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करेंगे। इस बैठक के दौरान भारत को मजबूत बनाने और समाज के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। इस दौरान हिंदू प्रतिनिधियों, चिन्मय समूह, और इस्कॉन के प्रमुखों ने भी बैठक में भाग लिया। RSS के सह-सरकार्यवाह सीआर मुकंदा ने मणिपुर की स्थिति पर अपनी राय दी। उन्होंने बताया कि मणिपुर में शांति स्थापित करने की पूरी कोशिश की गई है। सरकार ने वहां सुधारात्मक कदम उठाए हैं, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 20 महीनों से मणिपुर में जो घाव हैं, उन्हें भरने में अभी समय लगेगा। क्षेत्रीय प्रमुख भी अपने कार्यों, कार्यक्रमों, भूमिका और भविष्य की योजनाओं को प्रस्तुत करेंगे, जिनकी समीक्षा की जाएगी।बैठक के बाद सीआर मुकुंदा ने प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए संघ के कार्यों की जानकारी दी. सीआर मुकुंदा ने कहा कि हमने जाकिर हुसैन, वासुदेव नायर, पूर्व पीएम डॉ. मनमोहन सिंह, प्रीतीश नंदी, एसएम कृष्णा, राम जन्मभूमि के ट्रस्टियों में से एक कामेश्वर चौपाल, तुलसी गौड़ा, शंकर तत्ववादी, देबेंद्र प्रधान, बिबेक देबराय को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 25 से 40 वर्ष के 1.63 लाख लोग आरएसएस से जुड़े, जबकि 40 साल से ऊपर के 20,000 लोग संगठन से जुड़े हैं. उन्होंने बताया कि 2012 से अब तक 12,73,453 से ज्यादा लोग हमारे साथ जुड़े और 46,000 महिलाओं ने रुचि दिखाई है. सीआर मुकुंदा ने कहा कि अरुणाचल, मणिपुर और बाहर के लोगों ने भी रुचि दिखाई है।इस दौरान उन्होंने कहा कि महाकुंभ न केवल हिंदुओं के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए यह विशेष था. यह हमारी सांस्कृतिक विरासत थी. मेले में नेत्र परीक्षण शिविर लगाए गए थे, जिसमें 2,37,964 लोगों ने आंखों की जांच करवाई. हमारे शिविर में आने वाले लोगों के 17,069 मोतियाबिंद ऑपरेशन किए गए।मणिपुर की चर्चा:उन्होंने कहा कि 20 महीनों से मणिपुर बुरे दौर से गुजर रहा है, हम अच्छे की उम्मीद करते हैं. हमने उम्मीद जताई है कि मणिपुर में जल्द ही हालात सामान्य होंगे. उन्होंने कहा कि 20 महीनों से जो घाव है, उसे भरने में लंबा समय लगेगा।बता दें कि बेंगलुरु में आरएसएस की तीन दिवसीय बैठक शुरू हुई है. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इसका उद्घाटन किया जो 21 से 23 मार्च तक चलेगी. इस बैठक में 1500 से अधिक कार्यकर्ता शामिल होंगे. इनमें क्षेत्रीय और राज्य स्तर के अधिकतर कार्यकर्ता होंगे. शताब्दी वर्ष की प्रगति की समीक्षा के साथ ही आगामी वर्ष के लिए विविध कार्यक्रमों, आयोजनों और अभियानों की रूपरेखा भी तैयार की जाएगी।इससे पहले प्रचार प्रमुख सुनील अंबेडकर की ओर से जारी बयान में बैठक को लेकर जानकारी दी गई. उन्होंने बताया कि संघ व्यवस्था में इस बैठक को सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था माना जाता है और इसका आयोजन हर साल होता है।देश की राजनीति में एक बड़ी बहस परिसीमन को लेकर भी चल रही है। दक्षिण के राज्यों ने बार-बार इस बात की चिंता जताई है कि अगले परिसीमन के बाद दक्षिण के राज्यों की सीटें कम हो सकती हैं। ( बेंगलुरु से अशोक झा )
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