पड़ोसी राष्ट्र बांग्लादेश की सेना ने राजधानी ढाका में बड़ी संख्या में बख्तरबंद वाहनों और बड़ी संख्या में सैनिकों को बुलाया है। भारत बांग्लादेश सीमा पर भी खुफिया विभाग ने अलर्ट जारी किया है। चर्चा है कि जल्द ही बांग्लादेश में कुछ बड़ा होने वाला है। मोहम्मद यूनुस या तो हटाए जाएंगे या सेना बांग्लादेश पर करेंगी कब्जा। रिपोर्ट के अनुसार, सेना की हर ब्रिगेड से 100 सैनिकों को ढाका में इकठ्ठा होने को कहा गया है। ये घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब बांग्लादेश की सेना और हसीना विरोधी आंदोलन की अगुवाई करने वाले संगठन स्टूडेंट अगेंस्ट्र डिस्क्रिमिनेशन के बीच संबंधों में दरार की खबरें आई है। रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि सावर स्थित सबसे महत्वपूर्ण 9वीं डिवीजन के सैनिकों ने क्रमिक तरीके से ढाका में प्रवेश करना शुरू कर दिया है।बांग्लादेश के सुरक्षा प्रतिष्ठान के उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से कहा है कि सेना देश को देश पर अपनी पकड़ मजबूत करने में कुछ और दिन लगेंगे। बांग्लादेश की सेना के पास डिवीजन आकार की 10 क्षेत्रीय कमान है, जिनमें ब्रिगेड की कोई निश्चित संख्या नहीं है। 9वीं इंन्फैंट्री डिवीजन सावर में स्थित है, जबकि एक अन्य महत्वपूर्ण 19वीं इन्फैंट्री डिवीजन घाटैल में तैनात है।हाल ही में दो ऐसी घटना हुई है, जिससे चलते संभवतः सेना ने यह कदम उठाया होगा. कुछ दिनों पहले छात्र नेता और ग्रामीण विकास व सहकारिता मंत्रालय के सलाहकार आसिफ महमूद शाजिब भुइयां का एक पुराना वीडिया सामने आया, जिसमें वह दावा करते नजर आए कि सेना प्रमुख जनरल वकर-उज-जमान ने अनिच्छा से मोहम्मद यूनुस को बांग्लादेश की बागडोर देने पर सहमति व्यक्त की थी। इससे पहले, एक अन्य छात्र नेता हसनत अब्दुल्ला ने 11 मार्च को जनरल जमान के साथ हुई एक गुप्त बैठक के बाद सेना के खिलाफ आंदोलन शुरू करने की सार्वजनिक रूप से धमकी दी थी। ऐसा इसलिए क्योंकि आर्मी चीफ ने शेख हसीना की पार्टी 'अवामी लीग' के बांग्लादेश की राजनीति में वापस आने और चुनाव लड़ने की बात कही थी।आर्मी चीफ ने क्यों उठाया यह कदम? आर्मी चीफ और वर्तमान में बांग्लादेश की सत्ता संभाल रहे नेताओं के बीच सबकुछ ठीक नजर नहीं आ रहा है। कई रिपोर्ट्स में यह सामने आया है कि आर्मी चीफ यूनुस प्रशासन को बांग्लादेश के हालातों पर नियंत्रण के लिए लगातार चेतावनी दे रहे हैं। ऐसे में छात्र नेताओं को यह आशंका है कि आर्मी चीफ एक बार फिर शेख हसीना की आवामी लीग के लिए रास्ता बना रहे हैं। यही कारण है कि जिन लोगों के हाथ में अभी बांग्लादेश की बागडोर है, वह आर्मी की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी को देखते हुए आर्मी चीफ ने आगे किसी बड़े आंदोलन से निपटने की अपनी तैयारियां पहले से शुरू कर दी हैं। ढाका में सैनिकों के जमा होने के निर्देश को इसी तैयारी के लिहाज से देखा जा रहा है। बांग्लादेश की सेना को भुइयां के खुलासे और अब्दुल्ला की फेसबुक पोस्ट के बाद नया छात्र आंदोलन खड़ा होने का डर सता रहा है। यह अभी स्पष्ट नहीं है कि सेना कठोर कदम उठाएगी या नहीं। यूनुस 26 मार्च को तीन दिवसीय चीन यात्रा पर जाने वाले हैं। माना जा रहा है कि कानून और व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने पर यूनुस अपनी चीन यात्रा रद्द कर सकते हैं। बांग्लादेश में अधिकांश लोग 11 मार्च की बैठक के विवरण से हैरान थे, जो सेना प्रमुख को "खराब रोशनी" में दिखाने और एक असफल आंदोलन को पुनर्जीवित करने के प्रयास के रूप में सार्वजनिक किए गए थे।
सरकारी सलाहकार ने कहा कि चुनाव आयोग स्वतंत्र रूप से काम कर रहा है और सभी दलों को समान अवसर मिलेगा। उन्होंने विपक्षी दलों से भी आग्रह किया कि वे चुनाव प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाएं।"विपक्षी दलों की रणनीति"मुख्य विपक्षी पार्टी बीएनपी (BNP) लंबे समय से चुनावी सुधारों की मांग कर रही है। पार्टी का आरोप है कि पिछले चुनावों में धांधली हुई थी, इसलिए इस बार निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।चुनाव आयोग ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। नए मतदाताओं के पंजीकरण, सुरक्षा इंतजाम और मतदान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए काम किया जा रहा है"राजनीतिक माहौल गर्माया"चुनाव की घोषणा से बांग्लादेश की राजनीति गर्मा गई है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई है, और आने वाले महीनों में सियासी गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है। ( बांग्लादेश बोर्डर से अशोक झा )
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